पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि फुटपाथ पर सुरक्षित रूप से चलना प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है और इस अधिकार में किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने लुधियाना नगर निगम को शहर के विभिन्न फुटपाथों पर अवैध कब्जों की शिकायतों की तत्काल जांच करने और तय समय के भीतर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यह जनहित याचिका एक स्थानीय समाचार पत्र के संपादक द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि लुधियाना शहर के अधिकांश फुटपाथ रेहड़ी-फड़ी वालों और अन्य अवैध अतिक्रमणों की चपेट में हैं। इसके चलते लोगों को मजबूर होकर व्यस्त सड़कों पर पैदल चलना पड़ता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच कई बार प्रशासन को शिकायतें और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के ‘मणिहार इलियाज शेख बनाम पी. अय्यप्पन’ मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत सुरक्षित फुटपाथ पर चलने का अधिकार मौलिक अधिकार है और इस अधिकार को मोटर वाहनों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए।