मानसून सीजन के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उत्तराखंड में 2 जुलाई को राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक साथ आयोजित इस अभ्यास में क्लाउड बर्स्ट, बाढ़, भूस्खलन, हिमस्खलन और अतिवृष्टि जैसी आपदा परिस्थितियों का वास्तविक घटनाओं की तर्ज पर अभ्यास किया गया। इस मॉक ड्रिल में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सेना, अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे अभ्यास की मॉनिटरिंग करते हुए प्रदेशभर की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान कंट्रोल रूम से मौसम की स्थिति, संवेदनशील क्षेत्रों और विभिन्न जिलों में चल रहे राहत एवं बचाव अभ्यास पर लगातार नजर रखी गई, ताकि किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान सभी विभाग 24×7 अलर्ट मोड में रहें और किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना आदान-प्रदान और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पूर्व तैयारी, समय पर प्रतिक्रिया और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से जन-धन के नुकसान को न्यूनतम करना है। इसी रणनीति के तहत संवेदनशील क्षेत्रों में मशीनरी, राहत सामग्री, बचाव दल और आवश्यक संसाधनों की पहले से ही तैनाती की गई है। राज्य सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों के अनुभवों से सीख लेते हुए उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन प्रणाली को लगातार अधिक आधुनिक, सशक्त और त्वरित प्रतिक्रिया देने योग्य बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों को प्राथमिकता के साथ अंजाम दिया जा सके।