पंजाब में खेल और राजनीति का पुराना रिश्ता
पंजाब में खेल और राजनीति का जुड़ाव कोई नया नहीं है। आजादी के बाद से ही राज्य के कई खिलाड़ी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे हैं। हॉकी, फुटबॉल, कबड्डी, बास्केटबॉल, क्रिकेट और कुश्ती से जुड़े कई चेहरों ने खेल के मैदान के बाद राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई है। हाल के वर्षों में यह भागीदारी और अधिक दिखाई देने लगी है।
खेल से राजनीति तक पहुंचने का रास्ता
खिलाड़ियों का राजनीतिक सफर हमेशा सीधे चुनाव लड़ने से शुरू नहीं हुआ। कई खिलाड़ी खेल के बाद पुलिस, प्रशासन या खेल विभाग जैसी सरकारी जिम्मेदारियों से जुड़े और बाद में चुनावी राजनीति में आए। पंजाब में यह सिलसिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ियों तक पहुंचा है। परगट सिंह, सुरिंदर सिंह सोढ़ी, सज्जन सिंह चीमा, राजबीर कौर, नवजोत सिंह सिद्धू, हरभजन सिंह, करतार सिंह और गुरलाल सिंह घनौर जैसे नाम इस बदलाव के उदाहरण हैं। इन खिलाड़ियों ने अलग-अलग समय पर विधानसभा, संसद या राजनीतिक संगठनों में भूमिका निभाई है।
परगट सिंह की लंबी राजनीतिक पारी
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान परगट सिंह खेल के बाद सक्रिय राजनीति में आए प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह जालंधर कैंट विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने और पंजाब सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। उनका राजनीतिक सफर कई चुनावों तक जारी रहा है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट सीट पर परगट सिंह के सामने भारतीय हॉकी के पूर्व खिलाड़ी सुरिंदर सिंह सोढ़ी मैदान में थे। सोढ़ी 1980 मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे थे। खेल के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस में वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर भी काम किया और फिर चुनावी राजनीति में कदम रखा।
बास्केटबॉल और महिला हॉकी से जुड़े चेहरे
पूर्व भारतीय बास्केटबॉल खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता सज्जन सिंह चीमा ने भी राजनीति में प्रवेश किया। वह आम आदमी पार्टी के टिकट पर सुल्तानपुर लोधी से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसी तरह भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान राजबीर कौर भी राजनीति से जुड़ीं।
क्रिकेट के सितारे भी सियासत में
पंजाब की राजनीति में क्रिकेट से आने वाले सबसे चर्चित चेहरों में नवजोत सिंह सिद्धू का नाम शामिल है। क्रिकेट करियर के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया और अमृतसर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। बाद में वह पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अमृतसर ईस्ट सीट से हार का सामना करना पड़ा। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने भी राजनीति में प्रवेश किया। 2022 में आम आदमी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। इस तरह क्रिकेट के मैदान से राष्ट्रीय राजनीति तक उनका सफर पहुंचा।
कुश्ती और कबड्डी के खिलाड़ी भी पीछे नहीं
पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित पहलवान करतार सिंह ने भी राजनीति में कदम रखा और आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े। वहीं अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरलाल सिंह घनौर ने 2022 में घनौर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। उनका राजनीतिक सफर पंजाब की ग्रामीण खेल संस्कृति से निकलकर विधानसभा तक पहुंचने का उदाहरण है।
जस्सा पट्टी के जरिए नई कड़ी जुड़ी
खिलाड़ियों के राजनीति में प्रवेश की यह कड़ी 2026 में भी आगे बढ़ी। कुश्ती जगत में ‘जस्सा पट्टी’ के नाम से पहचान रखने वाले जसकंवर सिंह पट्टी अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद जुलाई 2026 में उन्हें पट्टी विधानसभा हलके का प्रभारी नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति पंजाब की राजनीति में खेल पृष्ठभूमि वाले नए चेहरों की सक्रियता को भी दिखाती है। पट्टी में उनकी राजनीतिक भूमिका से जुड़े कार्यक्रमों में स्थानीय संगठनों ने अपनी मांगें भी रखी हैं।
खिलाड़ियों को राजनीति की ओर क्यों आकर्षित करती है?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ियों की अपनी पहचान पहले से होती है। खेल उपलब्धियों के कारण उन्हें समाज में व्यापक पहचान मिलती है। इसके अलावा खेल से जुड़ा अनुशासन, टीमवर्क और लंबे समय तक सार्वजनिक संपर्क भी उनके सार्वजनिक जीवन का आधार बन सकता है। पंजाब में खेलों की मजबूत सामाजिक और ग्रामीण संस्कृति भी इस प्रक्रिया को प्रभावित करती है। राजनीतिक दलों के लिए लोकप्रिय खिलाड़ी युवाओं और खेल समुदाय से जुड़ने का एक माध्यम बन सकते हैं। हालांकि किसी खिलाड़ी की लोकप्रियता अपने आप चुनावी सफलता में तब्दील नहीं होती। पंजाब में ऐसे भी कई खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली। इसलिए खेल उपलब्धि और राजनीतिक सफलता को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखना जरूरी है।