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बिहार NDA में सीट शेयरिंग पर फंस गया पेंच, सितंबर की बैठक में नहीं निकला फार्मूला तो होगी मुश्किल

एनडीए में सीट शेयरिंग का फार्मूला तय नहीं हुआ है. जबकि बिहार विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है. चर्चा है कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में चुनाव आयोग तारीखों की घोषणा कर सकता है. ऐसे में सितंबर ही महत्वपूर्ण महीना है. एनडीए में अगले महीने सर्वदलीय बैठक होगी, जिसमें सीट बंटवारे पर चर्चा और मुहर लग सकती है.

लोजपा रामविलास के नेता और सांसद अरुण भारती ने 43 से 137 सीट पर दावेदारी का बयान देकर दबाव बढ़ा दिया है. लोजपा जिन सीटों की मांग कर रही है, उनमें ज्यादातर सीटें जदयू के पास हैं. इसे लेकर टकराव की आशंका है. हालांकि जदयू नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के चेहरे पर कोई विवाद नहीं है और सीटों पर भी सहमति बन जाएगी.

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चिराग पासवान दबाव की रणनीति अपना रहे हैं. अरुण भारती उनके करीबी और रिश्तेदार हैं, इसलिए उनका बयान अहम माना जा रहा है. लेकिन इस बार हालात 2020 जैसे नहीं हैं, क्योंकि चिराग केंद्र में मंत्री हैं. ज्यादा विवाद होने पर उन्हें भी समझौता करना पड़ेगा.

एनडीए में सीट बंटवारे पर एक राउंड की बातचीत हो चुकी है. सभी दलों ने अपनी मनपसंद सीटों की लिस्ट बीजेपी को दे दी है. बैठक में यही फाइनल होगा कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा. सूत्रों के अनुसार बीजेपी और जदयू 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, जबकि लोजपा को 20 से 24 सीट मिल सकती हैं. जीतन राम मांझी की पार्टी को 6 से 7 सीट और उपेंद्र कुशवाहा को 5 से 6 सीट मिलने की संभावना है.लोजपा रामविलास ने ब्रह्मपुर, अतरि, ओबरा, सिमरी बख्तियारपुर, लालगंज, तारापुर, कुशेश्वरस्थान, गोविंदगंज और राघोपुर जैसी सीटों पर दावेदारी जताई है. इनमें से कई सीटें जदयू के पास रही हैं. राघोपुर से तेजस्वी यादव लगातार जीतते रहे हैं. 2020 में आरोप लगे थे कि चिराग ने यहां कैंडिडेट देकर तेजस्वी को फायदा पहुंचाया.

2020 विधानसभा चुनाव में जदयू ने 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था. मांझी की पार्टी को 7 सीटें मिली थीं. उस समय एनडीए में चार दल थे, इस बार पांच दल हैं, इसलिए समझौता मुश्किल हो रहा है. चिराग पासवान राज्यसभा और विधान परिषद की सीटें भी चाहते हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा भी परिषद में प्रतिनिधित्व चाहते हैं.

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