उत्तराखंड में प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के जवानों का अपनी मांगों को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत दे रहा है। लंबे समय से मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से जवानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को देहरादून के गांधी पार्क में सहसपुर, रायपुर और डोईवाला ब्लॉक के PRD जवानों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में शामिल जवानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता देहरादून जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट और प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत ने संयुक्त रूप से की। इसमें संगठन के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में जवान मौजूद रहे। सभी ने संगठन के फैसलों के साथ एकजुट होकर खड़े रहने और अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
110 दिन तक चला था धरना, फिर भी नहीं मिला समाधान
बैठक में वक्ताओं ने बताया कि PRD जवान अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इसी क्रम में जवानों ने 18 मार्च से देहरादून के एकता विहार धरना स्थल पर लगातार 110 दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद 7 जुलाई को विभागीय मंत्री रेखा आर्य के साथ हुई बातचीत के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था। जवानों के अनुसार, उस दौरान मंत्री की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि उनकी मांगों को आगामी कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा और समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, संगठन का कहना है कि इसके बाद कई कैबिनेट बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इसी वजह से जवानों में असंतोष बढ़ रहा है और वे दोबारा आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
PRD जवानों की क्या हैं दो प्रमुख मांगें?
PRD जवानों ने सरकार के सामने अपनी दो मुख्य मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि उन्हें मौजूदा मानदेय व्यवस्था के बजाय होमगार्ड जवानों की तर्ज पर मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) दिया जाए। दूसरी मांग है कि उन्हें साल के सभी 365 दिन रोजगार की गारंटी मिले। जवानों का कहना है कि वे प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और विभिन्न सरकारी विभागों की जिम्मेदारियों में लगातार सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। कई बार ड्यूटी नहीं मिलने के कारण उन्हें लंबे समय तक खाली बैठना पड़ता है। संगठन का मानना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
1 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस, आंदोलन की रणनीति होगी सार्वजनिक
गांधी पार्क में हुई संयुक्त बैठक में आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा की गई। संगठन ने प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों से सुझाव मांगे हैं, ताकि आगामी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सके। सहसपुर, रायपुर और डोईवाला के जवानों ने भी अपनी ओर से सुझाव और प्रस्ताव बैठक में रखे। संगठन के मुताबिक, आगामी 1 नवंबर को प्रदेश स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न जिलों से मिले सुझावों के आधार पर सरकार के खिलाफ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी। फिलहाल आंदोलन का स्वरूप और तारीखों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सरकार और प्रशासन को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बैठक में जवानों ने कहा कि अब तक उन्होंने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखा है। लंबे धरने और बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकलने से उनका भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब भी उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। जवानों ने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रशासनिक या व्यवस्थागत स्थिति की जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। हालांकि, आंदोलन के अगले चरण की विस्तृत जानकारी 1 नवंबर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही सामने आएगी।
बैठक में प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी विनोद तोमर, प्रदेश कोषाध्यक्ष चरण सिंह चौहान, संगठन मंत्री पुष्कर थपलियाल सहित विभिन्न पदाधिकारी और बड़ी संख्या में PRD जवान मौजूद रहे। बैठक में सभी ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही। अब सबकी नजरें 1 नवंबर को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर हैं, जिसमें PRD संगठन अपनी आगे की रणनीति सार्वजनिक करेगा। फिलहाल जवानों की दो प्रमुख मांगें—बेहतर वेतन व्यवस्था और सालभर रोजगार की गारंटी—इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं।
