पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह लगातार गहराती जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पार्टी की बैठकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी खुलकर सामने आने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने वड़िंग के खिलाफ खुला विरोध शुरू कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष और स्पष्ट दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में कांग्रेस के चुनावी अभियान के दौरान कई स्थानों पर चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग के खिलाफ नारे लगाए। पटियाला और संगरूर में आयोजित कार्यक्रमों में स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दोनों गुटों के समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कुर्सियां तक चलने की नौबत आ गई। पार्टी सूत्रों के अनुसार इन घटनाओं की जानकारी कांग्रेस नेतृत्व तक भी पहुंच चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की भूमिका भी चर्चा में है। उन्होंने 31 जुलाई से ‘हर बूथ-कांग्रेस मजबूत’ अभियान की शुरुआत की, लेकिन अभियान के पहले ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बना ली। इससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठने लगे और अभियान की टाइमिंग को लेकर भी कई नेताओं ने नाराजगी जताई। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जब संगठन के भीतर मतभेद पहले से मौजूद थे और संसद तथा विधानसभा सत्र के कारण कई नेता व्यस्त थे, तब चुनावी अभियान शुरू करने की जल्दबाजी उचित नहीं थी। उनका मानना है कि पहले संगठनात्मक विवादों का समाधान किया जाना चाहिए था ताकि अभियान का सकारात्मक संदेश कार्यकर्ताओं तक पहुंच सके। बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी हाल ही में निलंबित किए गए पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर से उनके आवास पर मिलने पहुंचे। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चन्नी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी के समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए तथा सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
उधर, कांग्रेस की इस अंदरूनी खींचतान पर भारतीय जनता पार्टी भी नजर बनाए हुए है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने नाराज कांग्रेस नेताओं का पार्टी में स्वागत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जो भी भाजपा की विचारधारा से सहमत होगा, उसके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं। हालांकि उन्होंने किसी विशेष नेता के पार्टी में आने को लेकर कोई पुष्टि नहीं की। कांग्रेस महासचिव एवं पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का पूरा ध्यान चुनाव जीतने और संगठन को मजबूत करने पर है। उन्होंने यह भी माना कि किसी भी बड़े राजनीतिक दल में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन सभी नेताओं को पार्टी हित में एकजुट होकर काम करना चाहिए। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भरोसा जताया कि मौजूदा मतभेद जल्द खत्म होंगे और पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता एक मंच पर दिखाई देंगे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी। दूसरी ओर, चरणजीत सिंह चन्नी ने भी कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी को अपने समर्पित नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान बनाए रखना चाहिए।