संसद के मानसून सत्र के बीच केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात की। करीब 50 मिनट तक चली इस बैठक में प्रस्तावित परिसीमन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित संशोधन और अन्य महत्वपूर्ण संसदीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से यह बैठक संसद में सहयोग और विश्वास का माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। बैठक के दौरान कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं। बाद में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल भी चर्चा में शामिल हुए। माना जा रहा है कि सरकार विपक्ष का रुख समझने और आगे की रणनीति तय करने के उद्देश्य से लगातार संवाद बनाए रखना चाहती है।
यह पिछले दस दिनों के भीतर किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की दूसरी मुलाकात थी। बैठक समाप्त होने के बाद रिजिजू ने संसद भवन में ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा और तेज हो गई कि सरकार आगामी विधायी रणनीति को लेकर तेजी से काम कर रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। चूंकि सत्र समाप्त होने के बाद संसद को स्थायी रूप से भंग नहीं किया जाता, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर कम समय के नोटिस पर विशेष सत्र बुलाना संभव है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार संविधान संशोधन से जुड़े इन विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रही है। पर्याप्त समर्थन मिलने के बाद ही विशेष सत्र बुलाने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव को 131वें संविधान संशोधन विधेयक के हिस्से के रूप में पेश किया गया था, लेकिन अप्रैल में आयोजित विशेष सत्र के दौरान इसे आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिल पाया था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हाल के विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा अन्य दलों के समर्थन की संभावनाएं भी तलाश रही है। चर्चा है कि दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रीय दलों का रुख भी इस विधेयक के भविष्य में अहम भूमिका निभा सकता है।
उधर कांग्रेस ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विशेष सत्र बुलाने को लेकर पार्टी को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख पहले जैसा ही है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। उनके अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री विपक्ष के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। केसी वेणुगोपाल ने FCRA विधेयक को लेकर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले सरकार विधेयक संसद में लाए, उसके बाद कांग्रेस अपना स्पष्ट रुख सामने रखेगी। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि विपक्ष इन दोनों विधेयकों पर सरकार को आसानी से समर्थन देने के मूड में नहीं है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आगामी दिनों में विशेष सत्र बुलाने का फैसला करती है या नहीं और संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद में सहमति बन पाती है या फिर एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिलेगा।