पंजाब भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी नई संगठनात्मक टीम का गठन कर दिया है। पार्टी ने इस बार ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं जिनके पास लंबे समय का राजनीतिक अनुभव और मजबूत जनाधार है। इसी कड़ी में तजिंदर सिंह बिट्टू को प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की दोआबा क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने और चुनावी तैयारियों को तेज करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। भाजपा का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस लगातार आंतरिक गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरी से जूझ रही है। ऐसे में अनुभवी नेताओं को आगे लाकर भाजपा कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। तजिंदर सिंह बिट्टू लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा रहे हैं और पार्टी की कार्यप्रणाली, संगठन और चुनावी रणनीति को करीब से समझते हैं। यही अनुभव अब भाजपा के लिए चुनावी हथियार बन सकता है।
बिट्टू कांग्रेस में रहते हुए वरिष्ठ नेताओं के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते थे। उन्हें पार्टी ने कई राज्यों में चुनावी और संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी थीं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में सचिव रहते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के रायबरेली संसदीय क्षेत्र में चुनावी प्रबंधन संभाला। वर्ष 2021 में उन्हें हिमाचल प्रदेश कांग्रेस का सह-प्रभारी बनाया गया, जहां संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे उनकी संगठनात्मक क्षमता भी महत्वपूर्ण कारणों में शामिल रही थी। तजिंदर सिंह बिट्टू जालंधर के राजिंदर नगर के निवासी हैं और जालंधर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम किया। वर्ष 2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उन्होंने जालंधर सेंट्रल सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और लगभग 29 हजार वोट हासिल किए थे। इसके अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के दौरान उन्हें पनसप का अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाई।
भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी उन्हें दोआबा क्षेत्र में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर सहित पूरे दोआबा क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान है। उन्हें प्रभावशाली सिख नेता और बेहतरीन वक्ता माना जाता है। भाजपा की कोशिश है कि बिट्टू के जरिए सिख समाज, कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं और नए मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत की जाए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में बिट्टू कार्यकर्ता सम्मेलन, सदस्यता अभियान और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं को भाजपा से जोड़ने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी जा सकती है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले कई बड़े राजनीतिक चेहरे पार्टी का दामन थाम सकते हैं, जिससे पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। नई संगठनात्मक टीम के गठन के साथ भाजपा ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव केवल पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे नहीं लड़ना चाहती, बल्कि अनुभवी नेताओं, मजबूत संगठन और सामाजिक समीकरणों के सहारे कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।