देहरादून:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की है। उत्तराखंड में यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक अभियान में सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार को केंद्र में रखते हुए लोगों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उत्तराखंड में इस अभियान को सिर्फ प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। राज्य में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में बीजेपी के इस महीनेभर चलने वाले अभियान के राजनीतिक और संगठनात्मक पहलुओं पर भी चर्चा हो रही है।
11 प्रमुख कार्यक्रमों के जरिए जनसंपर्क पर जोर
अभियान के तहत उत्तराखंड में 11 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया गया है। अभियान का उद्देश्य सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बनाने के साथ उनकी कहानियों और योजनाओं के प्रभाव को जनता के सामने रखना भी बताया गया है। बीजेपी की ओर से इस अभियान को सेवा और जनभागीदारी से जोड़कर पेश किया जा रहा है। पार्टी की योजना विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने की है।
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम है अभियान?
उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस अभियान को लेकर चर्चा है कि बीजेपी इसे व्यापक जनसंपर्क के अवसर के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। अभियान के जरिए संगठन और सरकार के स्तर पर जनता के साथ संवाद बढ़ाने, योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने और सरकार के कामकाज को लोगों के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र शेट्टी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस अभियान का उत्तराखंड में अलग राजनीतिक संदर्भ है, क्योंकि राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उनके अनुसार अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अभियान से जोड़ने के पीछे व्यापक जनसंपर्क की रणनीति भी देखी जा सकती है।
सीएम धामी बोले- अभियान उत्सव नहीं, सेवा का अवसर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभियान को नागरिकों की भागीदारी से जोड़ते हुए कहा है कि यह केवल उत्सव तक सीमित नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, सामाजिक संगठनों, महिला मंगल दलों और जनप्रतिनिधियों को अभियान में जोड़ने की बात कही है। धामी के मुताबिक अभियान के माध्यम से प्रदेश के नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ने और विभिन्न वर्गों के साथ संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
बीजेपी ने बताया जनभागीदारी का अभियान
उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार का कहना है कि अभियान के तहत किसी भी क्षेत्र और वर्ग को इससे बाहर नहीं रखा जाएगा। उनका जोर जनभागीदारी और जनसंवाद पर है। पार्टी का कहना है कि अभियान के दौरान लोगों से संपर्क बढ़ाने और सरकार की योजनाओं तथा कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाने पर फोकस रहेगा। बीजेपी की तैयारियों के तहत अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों की जिम्मेदारियां पार्टी पदाधिकारियों और मंत्रियों को भी सौंपी गई हैं।
कांग्रेस ने साधा निशाना
दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी के ‘सेवा संकल्प अभियान’ की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इसे ‘मेवा खाओ अभियान’ बताते हुए सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि राज्य में सामने आए विभिन्न विवादों और आरोपों के बीच बीजेपी जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी अभियान को चुनावी साल से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि बीजेपी चुनाव से पहले जनता के बीच सरकार के खिलाफ मौजूद असंतोष को कम करने के उद्देश्य से इस तरह के कार्यक्रम कर रही है।
बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। कुंदन परिहार ने कहा कि नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को बीजेपी सेवा और समर्पण से जोड़कर देखती है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाने का उद्देश्य इसी भावना को आगे बढ़ाना है। बीजेपी का कहना है कि सरकार का फोकस देश को विकसित राष्ट्र बनाने और केंद्र तथा राज्य की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर है।
अभियान से चुनावी फायदा कितना?
राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार नीरज कोहली के मुताबिक 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में बीजेपी का संगठन और सरकार दोनों चुनावी तैयारी के दौर में हैं। ऐसे में सेवा संकल्प अभियान के जरिए पार्टी को जनता के साथ संवाद बढ़ाने और सरकारी योजनाओं पर फीडबैक लेने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, किसी भी अभियान के शुरू होने के समय उसकी सफलता या राजनीतिक प्रभाव का निश्चित आकलन करना संभव नहीं है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जनता अभियान और उसके कार्यक्रमों को किस तरह लेती है।
अभियान का एक प्रमुख फोकस युवा वर्ग भी है। छात्रों और युवाओं को विभिन्न कार्यक्रमों से जोड़ने की योजना के जरिए बीजेपी इस वर्ग के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में यह अभियान सरकार की योजनाओं, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों को किस हद तक एक साथ जोड़ पाता है, यह उत्तराखंड की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण विषय रहेगा।