देहरादून के आसन कंजर्वेशन रिजर्व के आसपास खनन गतिविधियों को लेकर उठे विवाद के बीच जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की संयुक्त जांच रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निरीक्षण के दौरान किसी भी खनन पट्टाधारक या अनुज्ञाधारक द्वारा नियमों के विपरीत अवैध खनन गतिविधि संचालित होती नहीं पाई गई। हालांकि एसडीओ राजीव नयन नौटियाल द्वारा लगाए गए अवैध खनन के आरोपों के चलते यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। आसन कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कई सवाल उठाए गए थे। इसके बाद जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर 18 और 19 जून 2026 को प्रशासन, वन विभाग और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम ने क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। जांच के दौरान रिजर्व की 10 किलोमीटर की परिधि में आने वाले सभी स्वीकृत खनन पट्टों और स्टोन क्रशर इकाइयों की स्थिति का परीक्षण किया गया। संयुक्त रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के 14 फरवरी 2024 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि रिजर्व क्षेत्र की 10 किलोमीटर सीमा के भीतर किसी भी खनन परियोजना के संचालन के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की स्थायी समिति और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके अलावा संरक्षण रिजर्व की एक किलोमीटर परिधि में खनन गतिविधियों पर प्रतिबंध का भी जिक्र किया गया है। जांच के दौरान कई स्वीकृत खनन पट्टों का रिकॉर्ड खंगाला गया। रिपोर्ट के अनुसार एक खनन पट्टा रिजर्व से करीब 3.1 किलोमीटर की दूरी पर संचालित हो रहा है,
जिसकी अवधि 10 जून 2023 से 18 अप्रैल 2028 तक है। रिपोर्ट में इस पट्टे के लिए एनबीडब्ल्यूएल की अनुमति आवश्यक नहीं बताई गई है। वहीं करीब 7.4 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक अन्य पट्टे के लिए शमन उपायों के साथ प्रस्ताव को एनबीडब्ल्यूएल से संस्तुति मिलने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में दो अन्य खनन पट्टों के संबंध में एनबीडब्ल्यूएल की अनुमति लंबित होने का उल्लेख भी किया गया है। इनमें एक पट्टा रिजर्व से लगभग 4.2 किलोमीटर और दूसरा करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित ऑनलाइन पोर्टल बंद होने के कारण अनुमति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। एसडीओ राजीव नयन नौटियाल ने आरोप लगाया था कि संवेदनशील संरक्षण क्षेत्र और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद खनन गतिविधियां जारी हैं। इन आरोपों के बाद संयुक्त निरीक्षण कराया गया और सभी दस्तावेजों के साथ मौके की स्थिति का भी परीक्षण किया गया। संयुक्त जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि निरीक्षण के दौरान किसी भी स्थान पर अवैध खनन, नियमों का उल्लंघन या बिना अनुमति खनन गतिविधि संचालित होती नहीं मिली। रिपोर्ट में संबंधित विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों और स्थल निरीक्षण के आधार पर निष्कर्ष तैयार किए गए हैं। हालांकि अवैध खनन के आरोपों और कुछ खनन पट्टों की अनुमति प्रक्रिया को लेकर मामला अभी भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।