पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्माण श्रमिकों के कल्याण कोष की राशि को दूसरी सरकारी योजना में स्थानांतरित किए जाने के मामले में पंजाब सरकार को बड़ा झटका दिया है। डॉ. अंबेडकर वर्कर्स यूनियन (पंजाब) की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल निर्माण श्रमिक कल्याण कोष से मावां धीयां सत्कार योजना में राशि ट्रांसफर करने पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में पंजाब बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड के पुनर्गठन, बोर्ड के हालिया फैसलों और पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की मासिक पेंशन में कथित कटौती को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 1996 के कानून को सोशल सिक्योरिटी कोड-2020 में शामिल किए जाने के बाद पुराने कानून के तहत बोर्ड का पुनर्गठन कानूनी रूप से उचित नहीं है और सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया है। याचिका के अनुसार, पुनर्गठित बोर्ड ने दो जुलाई 2026 को मावां धीयां सत्कार योजना के लिए निर्माण श्रमिक कल्याण कोष से राशि स्थानांतरित करने का फैसला लिया। संगठन का आरोप है कि यह फंड केवल पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए निर्धारित है और इसका उपयोग किसी अन्य सरकारी योजना में करना कानून के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड ने पंजीकृत श्रमिकों की मासिक पेंशन में कटौती का फैसला लिया है, जिससे हजारों श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने हाईकोर्ट से बोर्ड के पुनर्गठन की अधिसूचना, फंड ट्रांसफर के निर्णय और पेंशन कटौती के आदेश को रद्द करने के साथ-साथ स्थानांतरित राशि को वापस वेलफेयर बोर्ड के खाते में जमा कराने की मांग की है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि महिलाओं के लिए चलाई जा रही मावां धीयां सत्कार योजना के लिए बजट में पर्याप्त राशि उपलब्ध है और योजना के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी और महिलाओं के हितों से जुड़ी यह योजना पूर्ववत जारी रहेगी।