उत्तराखंड के शहरी निकायों में अधिशासी अधिकारियों (EO) की कमी को दूर करने के लिए शहरी विकास विभाग ने कई कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी है। जारी किए गए आदेशों के बाद अब विभागीय व्यवस्था और नियमों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि विभाग में अधिशासी अधिकारियों के करीब 60 पद हैं, लेकिन इनमें से कई अधिकारियों को नगर निगमों में तैनात किए जाने के बाद अलग-अलग नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में पद खाली हो गए। इन रिक्त पदों को भरने के लिए विभाग ने विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी EO का दायित्व सौंपा है।
क्लर्क, कर निरीक्षक और अकाउंट कर्मचारियों को मिली जिम्मेदारी
शहरी विकास निदेशालय की ओर से जारी आदेशों में अकाउंट कर्मचारियों, कर निरीक्षकों, कर अधीक्षकों, क्लर्क और सफाई निरीक्षक स्तर के कर्मचारियों को अलग-अलग निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है। जारी आदेशों के अनुसार सतीश कुमार को नगर पालिका महुआखेड़ागंज, हेमंत कुमार गुप्ता को नगर पंचायत लंढौरा, गुरमीत सिंह को नगर पंचायत लंढौरा, रोशन सिंह पुंडीर को नगर पालिका गौचर और तारिक खान को नगर पालिका टिहरी में प्रभारी EO की जिम्मेदारी दी गई है।
इसके अलावा सरोज गौतम को नगर पंचायत नानकमत्ता, पूजा को नगर पालिका बाजपुर, अंकित राणा को नगर पंचायत पिरान कलियर, कुलदीप चौहान को नगर पंचायत ढंडेरा और यशवीर सिंह को नगर पंचायत तपोवन का प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है। वहीं दीपक बुडलाकोटि को नगर पालिका कालाढूंगी, भरत पंवार को नगर पालिका देवप्रयाग, कुलदीप नैथानी को नगर पंचायत ऊखीमठ, राकेश कोटिया को नगर पंचायत जसपुर और कुसुम मटूडा को नगर पालिका उत्तरकाशी में प्रभारी EO का दायित्व सौंपा गया है।
इसके अलावा वासुदेव डंगवाल को नगर पंचायत चमियाला, पंकज सिंह को नगर पंचायत लालकुआं और प्रेम सिंह रावत को नगर पालिका बड़कोट में प्रभारी अधिशासी अधिकारी बनाया गया है।
सफाई निरीक्षक को EO का प्रभार देने पर उठे सवाल
इस पूरी व्यवस्था में सबसे अधिक चर्चा सफाई निरीक्षक स्तर के कर्मचारी को अधिशासी अधिकारी का प्रभार दिए जाने को लेकर हो रही है। सवाल उठाया जा रहा है कि सफाई निरीक्षक अपने सेवा कैडर में पदोन्नति की सभी संभावनाएं पूरी करने के बाद भी सामान्य तौर पर अधिशासी अधिकारी के पद पर पदोन्नत नहीं हो सकते। इसके अलावा नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों की नियमित भर्ती उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों को प्रभारी EO बनाए जाने को लेकर नियमों की व्याख्या पर बहस शुरू हो गई है।
नियमों को लेकर भी विवाद
मामले में उत्तराखंड स्थानीय निकाय (केंद्रीकृत) सेवा नियमावली 2019 का हवाला दिया जा रहा है। नियमों के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियुक्ति पदोन्नति के माध्यम से या आयोग की चयन प्रक्रिया के जरिए की जानी चाहिए। पदोन्नति की स्थिति में सेवा अवधि और वरिष्ठता जैसे मानकों का पालन किया जाना आवश्यक है। इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अलग-अलग संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी EO बनाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में जारी आदेश का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसके अनुसार अधिशासी अधिकारी का प्रभार एसडीएम स्तर के अधिकारी को सौंपे जाने की व्यवस्था बताई गई थी। उत्तराखंड में भी लंबे समय तक इसी तरह की व्यवस्था का पालन किए जाने की बात कही जा रही है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी जारी है प्रभारी व्यवस्था
नगर निकायों में कर्मचारियों की कमी और प्रभारी व्यवस्था का मामला पहले भी नैनीताल हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। 2 मई 2025 को अदालत ने निकायों में कर्मचारियों की कमी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रदेश के कई नगर निकायों में लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को अधिशासी अधिकारी समेत कर संग्रहण, सफाई निरीक्षण और लेखा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त प्रभार दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की व्यवस्था से नगर निकायों का नियमित प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली मूलभूत सेवाओं पर पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सचिव शहरी विकास को संबंधित विषय पर निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
सरकार ने कहा- यह व्यवस्था पहले से चली आ रही है
वहीं, शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने इन नियुक्तियों का बचाव किया है। उनका कहना है कि प्रभारी EO की व्यवस्था नई नहीं है और पहले भी इसी तरह की तैनातियां होती रही हैं। मंत्री के अनुसार, जिन कर्मचारियों को पहले प्रभारी EO की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, उन्हीं में से कई को दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि विभाग में EO के कई पद रिक्त हैं और इसी वजह से प्रशासनिक कामकाज को सुचारु रखने के लिए ये तैनातियां की गई हैं।
अब देखना होगा कि प्रभारी अधिशासी अधिकारियों की इन नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों पर विभाग आगे क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या निकायों में रिक्त पदों को नियमित भर्ती या पदोन्नति के जरिए भरने की प्रक्रिया तेज की जाती है।