मणिपुर के उखरुल जिले में उग्रवादियों द्वारा किए गए घातक हमले में उत्तराखंड के दो वीर जवान शहीद हो गए। सोमवार दोपहर 40 असम राइफल्स के काफिले पर संदिग्ध उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया, जिसमें अल्मोड़ा निवासी वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और पौड़ी गढ़वाल निवासी हवलदार चंद्रमोहन सिंह ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इस घटना से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर है। बुधवार सुबह इम्फाल के बीर टिकेंद्रजीत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों शहीद जवानों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के बाद उनके पार्थिव शरीर सेना के हेलिकॉप्टर से उत्तराखंड के लिए रवाना किए गए। देर शाम तक दोनों वीर जवानों के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचने की संभावना है।
मणिपुर पुलिस के अनुसार पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोनों शहीदों के पार्थिव शरीर सेना को सौंप दिए गए। गुरुवार को उनके पैतृक गांवों में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में लोग अपने वीर सपूतों को अंतिम विदाई देंगे। शहीद हवलदार चंद्रमोहन सिंह पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा क्षेत्र स्थित डांडातोली गांव के रहने वाले थे। दो महीने पहले उनके पिता का निधन हुआ था और अंतिम संस्कार के बाद वह 3 जुलाई को ही दोबारा ड्यूटी पर लौटे थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द छुट्टी पर वापस आएंगे, लेकिन केवल तीन दिन बाद ही उनके शहीद होने की खबर पहुंच गई। अपने पीछे वह पत्नी, एक बेटे और दो बेटियों को छोड़ गए हैं।
जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे उखरुल जिले के नुंगशांग खोंग क्षेत्र में उग्रवादियों ने अत्याधुनिक हथियारों से काफिले पर अचानक हमला कर दिया। हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी के साथ आईईडी विस्फोट भी किए। इस हमले में दोनों उत्तराखंडी जवानों को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही वीरगति प्राप्त की। घटना में कुछ अन्य जवान भी घायल हुए हैं, जिनका उपचार जारी है। उत्तराखंड के इन दोनों वीर सैनिकों की शहादत ने पूरे प्रदेश को भावुक कर दिया है। लोगों ने उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण को नमन करते हुए उन्हें सच्चा राष्ट्रनायक बताया है। राज्यभर में शहीदों को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला लगातार जारी है।