मेरठ: करीब एक दशक पहले मेरठ में जिस जगह पशु वधशाला यानी कमेला संचालित होता था, उसे बंद कराकर बेटियों की शिक्षा के लिए स्कूल की स्थापना की गई थी। उस समय यहां छात्राओं को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने का सपना देखा गया था। आज यही विद्यालय पीएम श्री राजकीय विद्यालय का दर्जा हासिल कर चुका है, लेकिन स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही हैं। स्कूल में पढ़ाई कर रही छात्राओं और शिक्षकों के मुताबिक यहां बिजली, पानी, शिक्षकों की कमी और साफ-सफाई जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा स्कूल के आसपास मौजूद नाले और कचरे के कारण आने वाली दुर्गंध से भी छात्राओं और स्टाफ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि छात्राओं का कहना है कि उन्हें गर्मी और बदबू के बीच कक्षाओं में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है।
4 दिन से बिजली नहीं आने का छात्रा का दावा
कक्षा 11 में पढ़ने वाली छात्रा मंताशा ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर अपनी परेशानी बताई। उसके मुताबिक स्कूल में गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। छात्रा का कहना है कि करीब चार दिन से बिजली नहीं आ रही थी, जिसके कारण कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो रहा था। छात्राओं के सामने पानी की समस्या भी बनी हुई है। उनका कहना है कि कई बार पीने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। यानी एक तरफ गर्मी और बिजली की समस्या है, तो दूसरी तरफ पानी और साफ-सफाई की दिक्कतों के कारण छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्कूल के पास नाला और कचरे का ढेर
स्कूल की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक आसपास की गंदगी और दुर्गंध बताई जा रही है। विद्यालय के पास मौजूद नाले से लगातार दुर्गंध आने की शिकायत है। इसके अलावा आसपास कचरा जमा होने के कारण स्थिति और खराब हो जाती है। छात्राओं और शिक्षकों के अनुसार दुर्गंध का असर केवल स्कूल परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बार कक्षाओं के अंदर तक बदबू पहुंचती है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षकों का कहना है कि छात्राएं कई बार इस समस्या की शिकायत कर चुकी हैं।
कभी 2000 से ज्यादा छात्राएं पढ़ती थीं
बताया जा रहा है कि एक समय इस विद्यालय में 2000 से अधिक छात्राएं पढ़ती थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में छात्राओं की संख्या लगातार कम होती गई। वर्तमान में स्कूल में करीब 800 छात्राएं अध्ययनरत बताई जा रही हैं। हालांकि, स्कूल में छात्राओं की संख्या कम होने के बावजूद व्यवस्थाओं और स्टाफ से जुड़े सवाल अब भी बने हुए हैं।
13 सेक्शन, लेकिन शिक्षकों की कमी
स्कूल में वर्तमान में करीब 13 सेक्शन संचालित किए जा रहे हैं, जबकि शिक्षकों की संख्या जरूरत के मुताबिक पर्याप्त नहीं बताई जा रही। स्कूल प्रबंधन के अनुसार कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा चार प्रवक्ता पद खाली बताए जा रहे हैं। स्टाफ की कमी का सीधा असर पढ़ाई पर पड़ने की बात सामने आ रही है। शिक्षकों को अन्य प्रशासनिक और अतिरिक्त कार्यों में लगाया जाता है, जिससे कई बार छात्राओं को कक्षा में शिक्षक का इंतजार करना पड़ता है।
प्रभारी प्रधानाचार्य ने भी जताई बेबसी
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रभारी प्रधानाचार्य गीता सिरोही ने स्कूल की समस्याओं को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि स्कूल में 13 सेक्शन चल रहे हैं, लेकिन स्टाफ की कमी बनी हुई है। कई ऐसे काम होते हैं जिनकी वजह से शिक्षकों को दूसरी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं और छात्राओं को कभी-कभी बिना शिक्षक के कक्षा में रहना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के आसपास की बदबू और दुर्गंध के कारण छात्राओं और स्टाफ को परेशानी होती है। प्रधानाचार्य के मुताबिक छात्राएं बार-बार इस समस्या की शिकायत करती हैं, लेकिन संसाधनों और अधिकारों की सीमाओं के कारण वह खुद को कई मामलों में असहाय महसूस करती हैं।
सपा विधायक ने सरकार पर लगाए भेदभाव के आरोप
स्कूल की स्थिति को लेकर सपा विधायक रफीक अंसारी ने प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। विधायक के मुताबिक समाजवादी पार्टी के शासनकाल में तत्कालीन मंत्री आजम खान के प्रयासों से वर्ष 2016 में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज की स्थापना की गई थी।रफीक अंसारी ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इस विद्यालय की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्कूल के आसपास कुत्तों की नसबंदी केंद्र और नगर निगम के डिपो का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि स्कूल के पास नाला होने के कारण भी छात्राओं को परेशानी होती है। सपा विधायक ने आरोप लगाया कि स्कूल को लेकर कई बार विधानसभा में भी मुद्दा उठाया गया है। उन्होंने इसे सरकार की कथित उपेक्षा से जोड़ते हुए कहा कि भविष्य में सरकार बदलने पर विद्यालय को महाविद्यालय बनाने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, ये विधायक के राजनीतिक आरोप हैं और इन पर सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आना बाकी है।
शिक्षा विभाग ने जांच के दिए आदेश
स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी सक्रिय हुआ है। संयुक्त शिक्षा निदेशक ओंकार नाथ शुक्ला ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति शासन स्तर से होती है और इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से पत्राचार किया जाता है। उन्होंने स्कूल में मौजूद अव्यवस्थाओं को जल्द दूर करने का भरोसा दिया। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने जिला विद्यालय निरीक्षक को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं और कमियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराने की बात कही है। अधिकारी के मुताबिक रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजी जाएगी और स्कूल की व्यवस्थाओं को जल्द सुधारने का प्रयास किया जाएगा।
छात्राओं ने CM योगी से लगाई मदद की गुहार
स्कूल की छात्राओं ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्कूल की स्थिति सुधारने की अपील की है। छात्राओं का कहना है कि वे तमाम परेशानियों के बावजूद पढ़ाई कर रही हैं और स्कूल का शैक्षणिक परिणाम भी बेहतर रहता है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार स्कूल की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बिजली, पानी, साफ-सफाई, स्टाफ और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर करेगी। अब शिक्षा विभाग की जांच के बाद यह देखना अहम होगा कि स्कूल की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है और छात्राओं को कब तक मूलभूत सुविधाएं मिल पाती हैं।