लखनऊ:- उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को गति देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर उद्योग स्थापित नहीं करने वाली आठ कंपनियों के भूमि आवंटन रद्द कर दिए गए हैं। इन कंपनियों का कुल प्रस्तावित निवेश 414.25 करोड़ रुपये था। सरकार का कहना है कि निष्क्रिय परियोजनाओं को हटाकर गंभीर और सक्रिय निवेशकों को मौका दिया जाएगा, जिससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में तेजी आएगी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अनुसार यह कार्रवाई डिफेंस कॉरिडोर में लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से की गई है।
सबसे ज्यादा कार्रवाई अलीगढ़ नोड में
यूपीडा की ओर से जारी जानकारी के अनुसार सबसे अधिक छह कंपनियों के भूखंड आवंटन अलीगढ़ नोड में रद्द किए गए हैं। इनके अलावा झांसी और कानपुर नोड की एक-एक कंपनी का आवंटन भी निरस्त किया गया है।
इन कंपनियों पर हुई कार्रवाई
अलीगढ़ नोड में जिन कंपनियों का भूमि आवंटन रद्द किया गया है, उनमें—
- पी2 लॉजिटेक प्राइवेट लिमिटेड – ऑप्टिकल साइट्स निर्माण परियोजना (90 करोड़ रुपये)
- पीबीएम इंसुलेशंस प्राइवेट लिमिटेड – इंसुलेटेड मैट्स निर्माण (4 करोड़ रुपये)
- जय साई अनु ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड – प्रिसिजन कंपोनेंट्स निर्माण (100 करोड़ रुपये)
- नवराज मेटल वर्क्स – टंगस्टन रॉड निर्माण (20 करोड़ रुपये)
- ट्रैक्ट्रिक्स ऑप्टो डायनेमिक एलएलपी – प्रिसिजन एवं ऑप्टिकल उपकरण निर्माण (40 करोड़ रुपये)
- मिलकोर डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड – रक्षा उपकरण एवं हथियार निर्माण (98.25 करोड़ रुपये)
इन सभी कंपनियों को आवंटित भूमि समय पर परियोजनाएं शुरू न होने के कारण वापस ले ली गई है।
झांसी और कानपुर नोड में भी कार्रवाई
झांसी नोड में लोरेंको डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड को मल्टी ग्रेनेड लॉन्चर और गोला-बारूद निर्माण के लिए आवंटित 8 हेक्टेयर भूमि का आवंटन रद्द कर दिया गया। इस परियोजना का प्रस्तावित निवेश 42 करोड़ रुपये था। वहीं कानपुर नोड में कुंगआर्मर प्राइवेट लिमिटेड को रक्षा परिधान निर्माण के लिए आवंटित 1 हेक्टेयर भूमि भी वापस ले ली गई। इस कंपनी का प्रस्तावित निवेश 20 करोड़ रुपये था।
नए निवेशकों को मिलेगा मौका
यूपीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शशांक चौधरी ने कहा कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने वाली परियोजनाएं औद्योगिक विकास की गति को प्रभावित करती हैं। ऐसे भूखंड अब नए और गंभीर निवेशकों को उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि डिफेंस कॉरिडोर में विनिर्माण गतिविधियां तेज हों और उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम हो सके। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य सरकार के 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा।