छात्रों के समर्थन में पिछले 26 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को अपना अनशन समाप्त कर दिया। लेह एपेक्स बॉडी के सह-संयोजक चेयरिंग दोरजे लकरुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में वांगचुक ने सरकार की ओर से मिले लिखित आश्वासन के बाद यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम को छात्र आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने लिखित रूप में आश्वासन दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर कार्रवाई की जाएगी, बशर्ते वे किसी हिंसक गतिविधि में शामिल न रहे हों। इसके अलावा आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया गया है।
अनशन समाप्त करने से एक दिन पहले सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर समर्थकों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को हिंसक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका रास्ता केवल शांति और अहिंसा का है। उन्होंने कहा कि चाहे सामने वाला जैसा भी व्यवहार करे, आंदोलनकारियों को संयम बनाए रखना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। वहीं, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि नई पीढ़ी ने अनुशासन, सेवा और जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एक-दूसरे की मदद की, सफाई व्यवस्था संभाली, राष्ट्रगान गाया और पूरी जिम्मेदारी के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे देश के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत बताया। यह आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन से जुड़े और तब से आमरण अनशन पर थे। अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब अनशन समाप्त होने के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार अपने लिखित आश्वासनों को किस तरह और कितनी जल्दी लागू करती है।