देहरादून:- दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास की ओर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद अब इसका असर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी दिखाई दे रहा है। 21 जुलाई को दिल्ली में हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसी कार्रवाई के विरोध में बुधवार को देहरादून में कांग्रेस ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
देहरादून में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह गोगी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दिल्ली में कांग्रेस नेताओं के साथ हुई कार्रवाई का विरोध जताया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार का पुतला भी फूंका। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। कांग्रेस ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा और किसी भी दबाव में अपनी आवाज नहीं रोकेगा।
बीजेपी ने भी कांग्रेस के खिलाफ खोला मोर्चा
वहीं, देहरादून में बीजेपी ने भी कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन का घेराव किया। बीजेपी का यह प्रदर्शन दिल्ली में कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर किए गए प्रदर्शन के विरोध में आयोजित किया गया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए और पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की।
देहरादून में बढ़ा सियासी तापमान
एक ही दिन देहरादून में कांग्रेस और बीजेपी के आमने-सामने प्रदर्शन से प्रदेश की सियासत गरमा गई। एक ओर कांग्रेस ने दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में केंद्र सरकार का पुतला फूंका, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने कांग्रेस भवन का घेराव कर दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास की ओर किए गए कांग्रेस के प्रदर्शन का विरोध किया। दोनों दलों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती गई। राजधानी देहरादून में हुए इन विरोध प्रदर्शनों ने उत्तराखंड की राजनीति में भी नई बहस को जन्म दे दिया है।